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हिन्दी ब्लोगिंग पर विचार - विमर्श, विशेषज्ञ रविशंकर श्रीवास्तव के साथ।
  • Dinesh said:

    कुछ समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाना चाहूंगा। जो लोग लिख रहे हैं वो कांटीन्यू नहीं कर रहे हैं। ब्लाग सर्च करने का कोई बेहतर एग्रीगेटर नहीं है, जो था वह भी बंद हो गया। हल्की-फुल्की बातें लिखने, संस्मरण लिखने और अपनी यात्रा के बारे में बताने वालों ने ब्लाग लिखना बंद कर दिया है, क्योंकि यह सारा काम फेसबुक पर बड़ी आसानी से हो जाता है। टेक्नोलॉजी तेजी से बदलती है- ऑरकुट ने 2006 हमारी इंटरनेट से दोस्ती कराई और हमने उसी से किनारा कर लिया। ब्लाग के साथ भी कुछ वैसा ही हो रहा है। फेसबुक आलेख, बहस, मतांतर, सहमति और असहमति जैसी बौद्धिक गतिविधियों के लिए भी एक बेहतर प्लेटफार्म बनता जा रहा है। यह आपने भी महसूस किया होगा। ऐसी स्थिति में ब्लाग जैसे माध्यम का बेहतर इस्तेमाल कैसे हो सकता है, इस पर सोचने की जरूरत है।



    दिनेश जी आपका धन्यवाद, आपने सही समस्याओं की ओर इशारा किया है. परंतु ब्लॉग सर्च करने के लिए एग्रीगेटर की जरूरत अब नहीं है. एग्रीगेटर तो तब जरूरी था जब चंद ब्लॉग थे. अब तो पचास हजार से अधिक हिंदी ब्लॉग हैं और पांच हजार से ऊपर पोस्टें नित्य हो रही हैं, तो कोई भी ब्लॉग एग्रीगेटर में नई पोस्टें या ब्लॉग एक दो मिनट के लिए ही प्रकट हो सकता है. अब व्यक्तिगत पसंद वाले एग्रीगेटरों की जरूरत है जिसका लिंक मैंने ऊपर दिया है - कुछ अच्छे ब्लॉगों की सूची हिंदी ब्लॉगजगत में है.

    आपका यह कहना भी सही है कि टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है. परंतु ब्लॉग एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है, जो यकीन मानिए, कभी नहीं मरेगा. फेसबुक की सामग्री तो क्षण भंगुर होती है. आपने कल जो कमेंट किया था क्या आप फेसबुक में आज ढूंढ सकते हैं? जबकि ब्लॉग में यह बड़ा आसान है, एकदम सामने. दूसरे तरीके से कहें तो फ़ेसबुक में कचरा ज्यादा है जो आप सिर्फ अपने अधिकतम 5000 मित्रों के साथ साझा करते हैं. जबकि ब्लॉग को आप पूरी दुनिया की जनसंख्या के सामने साझा करते हैं. और यह एक बड़ा फर्क है.

    ब्लॉग माध्यम का बेहतर इस्तेमाल तो सिर्फ और सिर्फ यही है - और अधिक ब्लॉग लिखें!
  • सबसे पहले रवि भैया को प्रणाम, (मैं रतलाम में जन्मा अधिकांश जीवन छ्तीसगढ़ में बिताया, रवि भैया के साथ यह उल्टा है :-))
    प्रश्न:
    वर्षों से हिन्दी टूलकिट का प्रयोग कर रहा हूँ। किन्तु यह विंडोज 7 पर स्थापित नहीं होती। भाषा इंडिया का जो आई.एम.ई. है उसमें टाईप करना बहुत धीमा है, क्योंकि उसमें विकल्प आते हैं। इनस्क्रिप्ट सीखने की हिम्मत यदि न हो तो ट्रांसलिटरेशन का सेवन में कृपया कोई उपाय बताएं।

    सधन्यवाद,
    हितेन्द्र
  • हितेन्द्र जी, फिर तो आपके लिए एक दूसरा डेस्कटॉप वर्जन काम का होगा. यह एमएसएन की साइट पर उपलब्ध है और कई लोगों का मानना है कि यह ज्यादा बेहतर चलता है. डाउनलोड लिंक है -

    http://specials.msn.co.in/ilit/Hindi.aspx

    कृपया प्रयोग करें और बताएं.
  • अनमोल के प्रश्न के उत्तर में ललित कुमार के 17 किश्तों में लिखे आलेख श्रृंखला - एक अच्छे ब्लॉग की जरूरतें की कड़ी रह गई थी. इन आलेखों को आप यहाँ पढ़ सकते हैं -

    http://lalitkumar.in/hindi/blog-needs
  • धन्यवाद। मैंने इसे तत्काल इन्स्टाल करने का प्रयत्न किया। किन्तु भाषा इंडिया का आई.एम.ई. पहले से ही इनस्टाल होने की वजह से संदेश आया की यह तो पहले ही इन्स्टाल है। आपके द्वारा दिये गए लिंक पर जो स्क्रीन शाट हैं उनसे लगता है कि यह वही आई.एम.ई. है को भाषा इंडिया पर है। इसमें समस्या यही है कि नीचे विकल्प आते हैं, जिनसे टाईप करना धीमा हो जाता है। (उदाहरण के लिए "कि" लिखना चाहो तो बाई डिफ़ाल्ट यह "की" ही लिखता है।)

    सधन्यवाद,
    हितेन्द्र
  • नहीं, हितेन्द्र यह भाषा इंडिया की साइट वाला आईएमई नहीं है. तो पहले से इन्सटाइ आईएमई को अनइंस्टाल कर इसे इंस्टाल करें. और इसमें भी काम न बने तो गूगल आईएमई का डेस्कटॉप वर्जन भी है जो शायद आपके काम आए. इसे भी आप आजमा सकते हैं. डाउनलोड लिंक व इसमें काम कैसे करें के बारे में जानकारी यहाँ है -

    http://epandit.shrish.in/373/google-ime-offline-installer-full-setup-download/
  • भैया,

    पुराना अनइंस्टाल कर इसे इंस्टाल किया। अबे मेरी समस्या का समाधान हुआ। आपका हृदय से आभार!

    -हितेन्द्र
  • इस चर्चा को पढ़ रही हूँ और ऐसा लग रहा है एक नयी दुनिया में आ गयी हूँ :)
    हिंदी में लिखना पढ़ना तो दूर, बोलचाल को भी तरस जाया कराती थी. एक दिन तो हिंदी की इतनी कमी महसूस हुई के लगा बस एक 'संजीवनी' मिल जाए जो फिर से जिंदा कर दे हिंदी को मेरी ज़िन्दगी में. http://mydolchi.blogspot.in/2011/01/blog-post.html

    इस चर्चा के माध्यम से मैंने 'चिट्ठा चर्चा' में अपना उल्लेख पढ़ा और पाया के कई पाठकों ने मेरे ब्लॉग को पढ़ा और सराहा भी. अब हिंदी ब्लॉग जगत, इस चर्चा और अन्य ब्लोग्स को देख कर इतनी ख़ुशी हो रही है के पूछिए मत :).
    धन्यवाद
    वंदना नातू
  • Two steps to start and continue blogging in Devanagari:

    1. Use Gmail to type:

    image

    2. Send to post@posterous.com (and follow instructions from the reply you get)

  • कल्पना किजिये कि 1 माह या कुछ महीनों के लिये ब्लॉगस्पॉट या वर्डप्रेस ब्लॉक हो जाये या मेन्टेनेन्श के लिये रूकावट खड़ी हो तो या हमारे देश की सरकार या कोई बड़ी आईटी कम्पनी कोई ब्लॉग प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है या हम पूरी तरह इन मौजूद प्लेटफॉर्मस पर निर्भर हैं। मैने हमारे देश में विकसित गूगल अर्थ जैसी एक साईटISRO Bhuwan पर विजिट किया देखा बड़ा रद्दी है। बोरिंग और रूक रूक कर चलने वाला। टीडीआईएल द्वारा जो हिन्दी के मुफ्त जिस्ट फॉन्ट दिये गये हैं माडुलर के साथ उनको यूनीकोड में आॅनलाईन परिवर्तन का कोई मार्गदर्शन नही बताया गया है। मेरा एक सुझाव है कि हमारे हिन्दी समाचार पत्रों को एक पेज या संडे के संडे ब्लॉगरों के उत्साह वर्धन के लिये कुछ सप्ताहिक ब्लॉग सूची प्रकाशित करनी चाहिये। कुछ नही तो जो प्रसिद्ध समाचार पत्र जो महिलाओं के लिये मैगजीन निकालते हैं उनमे तो कम से ब्लॉग सूची प्रकाशित होनी ही चाहिये महिला ब्लॉगरो के उत्साह वर्धन हेतु।

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